पत्रकारिता क्‍या सचमुच ही सूचनाओं को इधर से उधर पहुंचाने का ही नाम है

आजकल पत्रकारिता को सूचनाप्रद पत्रकारिता बना दिया गया है । जैसे मुख्‍यमंत्री आए, कलेक्‍टर ने ऐसा कहा, अमुक पार्टी ने धरना दिया, फलाने नेता ने ऐसा का । मतलब कि कुलमिलाकर बात वही है कि सूचनाएं ही सूचनाएं हैं । पाठकों का समामान्‍य ज्ञान बढ़ाए रखने की पूरी कोशिश की जा रही है । कोई ये बताने की कोशिश नहीं करता कि अगर अमुक ने ऐसा कहा तो क्‍यों कहा उसके पीछे का कारण्‍ क्‍या है । कुछ सालों पहले तक जिला स्‍तर से हर सप्‍ताह एक स्‍तंभ प्रकाशित होता था जो जिले की चिट्ठी जैसा कुछ होता था । इसमें जिले का संवाददाता खबरों के पीछे की खबरें निकालने का प्रयास करता था । ये स्‍तंभ आज किसी भी समाचार पत्र में देखने को नहीं मिलता । समाचार पत्र के प्रधान कार्यालयों के संपादकों के इशारे पर ये स्‍तंभ सारे पेपरों ने बंद करवा दिये । हैरत की बात ये है कि ये स्‍तंभ प्रधान कार्यालय में बैठे संपादक स्‍वयं तो लिख रहे हैं पर दूसरों के लिये मनाही है । खबरों के पीछे की खबरे अब कोई नहीं बताता अब तो केवल सूचनाएं हैं केवल सूचनाएं । पाठक सूचनाओं को ही समाचार मान लेता है उसके लिये विज्ञप्तियां ही खबरें हैं । विश्‍लेषण करने वाले समाचारों को पाठक आज भी रुचि के साथ पढ़ता है क्‍योंकि वो जानना चाहता है कि  यही होता है तो फिर ऐसा ही होता क्‍यूं है ।

आज मुख्‍यमंत्री की जावर यात्रा और जावर को तहसील का दर्जा देने को सभी समाचार पत्रों ने प्रमुखता से छापा है ।

भास्‍कर  ने आज जावर में मुख्‍यमंत्री द्वारा जावर को तहसील का दर्जा देने की घोषणा को लीड बनाया है । और उसी के अंदर बाक्‍स लगाया है कांग्रेस के धरने को । इछावर के रिपोर्टर मोहम्‍म्‍द परवेज के समाचार पंचायते करेंगी पानी की जांच आज की प्रथम लीड है रोचक समाचार है तो सही किन्‍तु लीड बन जाए ऐसा भी नहीं है । सेवाकालीन शिक्षक प्रशिक्षण शिविर में 236 शिक्षकों के गायब रहने का समाचार आज लगा है ।

पत्रिका    के बारे में लिख लिख कर अब तो ऐसा लगने लगा है कि मानो अब थक गए हैं । यहां भी जावर तहसील घोषित समाचार लगा है । शिक्षक शिक्षिकाओं को प्रशिक्षण में नहीं आने पर नोटिस मिलने का समाचार यहां पर भी लगा है और साथ में कांग्रेस का धरना भी लगा है । आज पत्रिका पर कोई कमेंट नहीं ( कोई कब तक एक ही बात कहे)।

राज एक्‍सप्रेस  ने भी जावर को तहसील बनाने का समाचार प्रमुखता से छापा है । वहीं नगरीय प्रशासन आयुक्‍त से नगरपालिका के एक करोड़ के घोटाले की जांच कराने की मंत्री रुस्‍तम सिंह के आदेश का एक समाचार आज सेकैंड लीड है ये समाचार बाकी के समाचार पत्र नहीं उठा पाए हैं । कांग्रेस का धरना यहां पर भी है और साथ में एक समाचार विवाह बंद होने में चार दिन शेष होने का लगा है शायद समाचार लिखने वाले को ये जानकारी नहीं है कि इस वर्ष शुक्रास्‍त होने के कारण मई के प्रारंभ में ही विवाह बंद हो गए‍ थे । ये ही वो समाचार होते हैं जो कि पत्रकार के सामान्‍य ज्ञान को दर्शा देते हैं ।

नव दुनिया ने भी जावर को तहसील बनाने का समाचार लगाया है और साथ में ढाबों पर हो रही मयकशी को लेकर भी एक समाचार सैकेंड लीड है । समाचार में लगा हुआ शराब की बोतल का बड़ा सा चित्र अत्‍यंत भद्दा लग रहा है और नईदुनिया इंदौर के मानदंडों की अगर बात करें तो ये चित्र यहां नहीं होना चाहिये था । समाचार अच्‍छा है किन्‍तु बात वही है क‍ि अगर आप कह रहे हैं कि ढाबों में जाम टकरा रहे हैं तो उनका चित्र लगा कर प्रमाण तो दीजिये शराब की बोतल का लम्‍बा सा चित्र लगाकर क्‍या कहना चाह रहे हैं । बोवनी का समाचार भी आज फोटो के साथ लगा है ।

कुल मिलाकर आज के सारे समाचार पत्रों में एक ही बात है जावर को तहसील बना दिया गया । अब आईयेबात करें इसकी कि समाचार पत्रों ने क्‍या गलत किया है सबने छापा है कि जावर तहसील बना । जबकि तहसील बनने की केवल घोषणा की है मुख्‍यमंत्री ने बनने में तो अभी लम्‍बा समय लगना है ।

2 comments:

Suresh Chandra Gupta said...

यह वह सूचनाएँ हैं जो विज्ञापन मिलने के बदले में छापनी पड़ती हैं. वरना तो पत्रकार आज कल ख़बर तोड़ते हैं और उसकी चटनी बना देते हैं. सुनने देखने वालों की पसंद का तो कोई मतलब ही नहीं रह गया है. किसने क्या कहा, क्यों कहा इसे तो छोड़िये, किस ने क्या नहीं कहा यह तक तो छाप दिया जाता है.

Udan Tashtari said...

चलिये कम से कम जावर के तहसील बनने की शुरुवात तो हुई.