चुनाव वाले साल में समाचार पत्रों की शुरुआत होना किस बात की ओर संकेत करता है

मध्‍यप्रदेश में इस साल के अंत में ही विधान सभा के चुनाव होने हैं और जैसे कि संकेत मिल रहे हैं कि  इस बार के चुनाव बहुत ही रोचक होने हैं । पिछले चुनावों में तो दो बातें सीधे सीधे ही भाजपा के पक्ष में थीं पहली तो ये कि कांग्रेस के मुख्‍यमंत्री से जनता नाराज थी और दूसरे भाजपा की फायर ब्रांड नेत्री उमा भारती ने प्रचार की कमान संभाली थी । परिणाम भाजपा के लिये सुखद रहा । इस बार बात दूसरी है । भाजपा के मुख्‍यमंत्री तो बहुत ज्‍यादा अलोकप्रिय नहीं हुए हैं पर उनके मंत्रीगण खुलकर खेल रहे हैं । कहा जा रहा है कि इन दिनों मध्‍यप्रदेश में भ्रष्‍टाचार चरम पर है । तो हो सकता है कि भाजपा के मंत्री ही भाजपा को ले डूबें । कांग्रेस की अगर बात करें तो कांग्रेस तो ऐसा लग रहा है मानो चुनाव को लेकर अभी मन ही नहीं बना पाई है कि चुनाव इसी साल होने हैं । टूटी और बिखरी कांग्रेस के लिये ये चुनाव बहुत मुश्किल साबित होने हैं । उमा भारती की भाजश की अगर बात करें तो उसका काम एक ही होगा भाजपा को कितना नुकसान पहुंचाया जाए और दरअसल में ये ही भाजपा के लिये चिंता का विषय है क्‍योंकि पिछले चुनावों में 70 सीटें ऐसी थीं जहां पर फैसला 3 से 4 हजार के अंतर से हुआ था वो भी भाजपा की मजबूत लहर में तो इस बार भाजश ने अगर उतने ही वोट काट दिये तो । उधर मायावती के कारण बुदेलखंड में बसपा मजबूत है । कुलमिलाकर एक त्रिशंकु विधानसभा के संकेत मिल रहे हैं और इसी खेती को काटने के लिये आ रहे हैं नए नए समाचार पत्र । पत्रिका आ गया  हिन्‍दुस्‍तान आ रहा है और विजय द्वार आने को है । दरअसल में जहां हरियाली दिखाई देती है सारे सांड चरने के लिये उसी तरफ दौड़ते हैं और अज के समचार पत्रों के मालिक भी ये ही हो गए हैं सारी हरियाली को चर जाना चाहते हैं और जब एक पहले से चर रहे सांड के इलाके में नया सांड आता है तो जाहिर सी बात है लड़ाई तो होगी ही ।

नवदुनिया :- रेटिंग ****

आज नवदुनिया  की बात पहले की जाए क्‍योंकि आज इसने अच्‍छे समाचार लगा कर बाजी मार ली है । सबसे पहले तो बिल्‍कुल जनता की और पाठकों की रुचि का समाचार आज लीड किया है । जिसमें सीहोर जिले के दो हिस्‍से हो जाने की संभावना और नए जिले के गठन की बात कही गई है । नसरुल्‍लागंज जो कि मुख्‍यमंत्री का क्षेत्र है का नया जिला बनने का समाचार आज खूब पढ़ा भी जाएगा और देर रात को सजने वाले पटियों पर बहस का विषय भी बनने वाला है । समाचार समग्र है । शहर में सटाम्‍प पेपरों का टोटा होने का समाचार भी अच्‍छा है और एक सुंदर सा खजूर का पेड़ का फोटो भी पेज का आकर्षण बढ़ा रहा है । प्री मानसून का समाचार चित्रों के साथ अच्‍छा लगा है । बरसात में सरकारी मकानों को लेकर भी एक समाचार लगा है । अंदर के पृष्‍ठों में दुकानों के अतिक्रमण हटाने का पुलिसिया कार्यवाई का समाचार मुख्‍य है ।

भास्‍कर :- रेटिंग **

भास्‍कर  का पेज आज कमजोर है आइये अब एक मूर्खता का नमूना देखें । समाचार है बाढ़ का खतरा  और सब हेडिंग है  बाढ़ से घिर जाते हैं सौ गांव  पूरे समाचार में उन गांवों का जिक्र है जो कि बाढ़ से घिर जाते हैं संसाधनों का जिक्र है और सरकारी तैयारियों का भी जिक्र किया गया है । मगर उसमें फोटो लगा है सीहोर के बस स्‍टैंड का कि यहां पर बरसात में कीचड़ हो जाता है । समझ में नहीं आता कि समाचार पत्रों के लोग क्‍या पाठक को मूर्ख समझ कर काम कर रहे हैं । बाढ़ के समाचार में सीहोर का बस स्‍टैंड क्‍यों लगा है जहां पर नदी तो छोड़ो किसी नाले या नाली का पानी भी नहीं आता । पुलिस द्वारा अतिक्रमण हटाये जाने का समाचार भी यहीं लगा है । अंदर के पृष्‍ठों में  रातों रात झोंपड़े बन जाने, बोवनी के शुरू होने और पिछले साल के पौधरोपण में तीस प्रतिशत पौधे बचने  के समाचार इछावर से लगे हैं जो कि रोचक हैं ।

पत्रिका :- रेटिंग *

पत्रिका  ने आज एक समाज द्वारा चल रहे आयोजनों में हो रही प्रतियोगिता में बन रहे बेसन और आटे के गहनों को लीड लगाया है ......( नो कमेंट) । अब आप ही तय करें कि जिले को तोड़े जाने की संभावना के रोचक समाचार ( नवदुनिया) और बाढ़ का खतरा जैसे सूचनाप्रद समाचा( भास्‍कर) के सामने बेसन और आटे के गहनों का समाचार ( पत्रिका) भला कौन पढ़ना चाहेगा । मगर पत्रिका के बारे में एक बात ही कही जा सकती है कि गलतियों से सबक लेने की आदत शायद यहां के लोगों में नहीं है । पत्रिका के बारे में एक और बात जो प्रारंभ से देखने में आ रही है वो ये कि इसके समाचार सरकारी कार्यालयों के आसपास ही घूमते हैं । बिना प्राचार्यों के शिक्षण सत्र शुरू होने का एक समाचार सैकेंड लीड है जो कि हेडिंग से रोचक तो लगता है पर पढ़ने पर केवल आंकड़े ही आंकडें हैं । कहीं कोई समाचार नहीं है कितने स्‍कूल कितनों में नहीं प्राचार्य जैसे आंकड़े फाइलों के लिये तो अच्‍छे होते हैं लेकिन पाठक तो कुछ और ही चाहता है । अंदर के पृष्‍ठों में एक समाचार इछावर से रोचक लगा है ये भी हालंकि है तो सरकारी विभाग का ही समाचार आठ पटवारियों पर दो दो हल्‍कों का वजन समाचार में इछावर के संवाददाता ने बता दिया है कि सरकारी विभागों के समाचारों को भी किस प्रकार पठनीय बनाया जा सकता है । आंकड़ों को अलग एक टेबल बना कर लगा दिया है और समाचार में आंकडे कहीं नहीं आते हैं समाचार समाचार की तरह ही चलता है । सीहोर के जिला कार्यालय के रिपोर्टर शैलेष तिवारी का भी एक ऐसा ही समाचार बिना प्राचार्यों के स्‍कूल में आंकड़े ही आंकड़े हैं समचार है ही नहीं । जबकि इछावर के समाचार में समाचार अलग है आंकडे अलग हैं ।

खैर जैसा कि पत्रिका के शुरू होने के बाद ही पाठक कह रहा है कि पेपर की छपाई अच्‍छी है डिजाइनिंग अच्‍छी है पर समाचार कहां हैं । पाठक को तो समाचार चाहिये । उसी तरह के समाचार जैसे भोपाल से आ रहे पत्रिका के पृष्‍ठों पर हैं ।  पहले भी इस स्‍तम्‍भ में कहा जा चुका है कि नवदुनिया भोपाल से आ रहे पृष्‍ठों की कमजोरी के कारण कमजोर हो रहा है जबकि उसके सीहोर के पृष्‍ठ बहुत मजबूत हैं । जबकि पत्रिका के मामले में उल्‍टा है इसके भोपाल से आ रहे पृष्‍ठ बहुत मजबूत हैं पर सीहोर के पृष्‍ठ तो अभी राज एकस्‍प्रेस जैसे समाचार पत्रों से भी कहीं पीछे और कमजोर है नवदुनिया और भास्‍कर से टक्‍कर की बात तो अभी सोची भी नहीं जा सकती । आज एक श्रेष्‍ठ समाचार पत्र यदि बनाना हो तो भोपाल से आ रहे पत्रिका के 1,2,3,4,5,6,11,12,13,14,15,16 पेजों में सीहोर की नवदुनिया के 9,10,11 और 16 नंबर के पेज लगा दिये जाएं।

2 comments:

Udan Tashtari said...

हरियाली दिखाई देती है सारे सांड चरने के लिये उसी तरफ दौड़ते हैं ...


आप तो सब जानते है. वही दौड़ तो चल रही है. मजे लिजिये..सांड दौड़ के. हो सके तो लाल कपड़ा भी दिखा कर किनारे हो लें. :)

हर्षवर्धन said...

बहुत बढ़िया समीक्षा की है। पैनी नजर से दोनों चीजें परखी हैं। मध्य प्रदेश की राजनीति भी और समाचार पत्रों से गायब होते समाचार को भी।